लखनऊ में ट्रांसपोर्टनगर के आवंटियों को एक बड़ी राहत मिल सकती है। करीब 2,000 लोगों की लंबे समय से मांग थी कि उनकी जमीन को फ्रीहोल्ड किया जाए, यानी वे अपनी ज़मीन को बिना एलडीए की अनुमति के बेच सकें। इसके लिए एलडीए बोर्ड 4 दिसंबर को बैठक करेगा और इस प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, आवासीय क्षेत्रों में व्यवसायिक गतिविधियों की अनुमति देने का भी प्रस्ताव होगा, ताकि लोग अपने घरों में सीमित व्यापार कर सकें। इसके अलावा, आईटी सिटी और वेलनेस सिटी में किसानों से सहमति लेकर जमीन लेने का और उन्हें बाजार दर पर मुआवजा देने का भी प्रस्ताव है।
ट्रांसपोर्टनगर योजना करीब 30 साल पहले आई थी, जब लोगों को लीज़ पर जमीन दी गई थी, जिससे वे बिना अनुमति के जमीन नहीं बेच सकते थे। अब कई सालों से लोग मांग कर रहे हैं कि उनकी जमीन फ्रीहोल्ड की जाए। इसके अलावा, जिन लोगों ने पांच साल के अंदर निर्माण नहीं कराया, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाता है।
सीबीआई जांच में फंसे जानकीपुरम के करीब 100 भूखंडों की रजिस्ट्रियों को भी मंजूरी देने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही एलडीए के कॉम्प्लेक्स में रहने वाले आवंटियों से मेंटेनेंस शुल्क लेने का प्रस्ताव भी है। कुछ विस्थापित इलाकों में लोगों को पीएम आवास योजना के तहत बिना ब्याज के किश्तों पर मकान दिए जाएंगे।
