गाजियाबाद में वकील पिछले एक महीने से हड़ताल पर हैं और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। वकीलों ने जनप्रतिनिधियों द्वारा समर्थन न मिलने पर नाराजगी जताते हुए चार विधायकों और मंत्रियों की बार सदस्यता रद्द कर दी है। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि इन जनप्रतिनिधियों को अब बार के चुनाव में मतदान का अधिकार भी नहीं रहेगा।
सदस्यता रद्द होने वाले जनप्रतिनिधि:
1. सुनील शर्मा – साहिबाबाद से विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री।
2. अजीतपाल त्यागी – मुरादनगर से भाजपा विधायक।
3. नंदकिशोर गुर्जर – लोनी से भाजपा विधायक।
4. नरेंद्र कुमार कश्यप – उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री।
वकीलों की मुख्य मांगें:
1. जिला जज का स्थानांतरण और निलंबन।
2. लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई।
3. वकीलों पर दर्ज सभी मुकदमों को वापस लिया जाए।
4. घायल वकीलों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
5. लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों को सजा दी जाए।
31 अक्टूबर को जिला जज की कोर्ट में पुलिस ने वकीलों पर लाठीचार्ज किया, जिसमें कई सीनियर वकील घायल हुए। इस घटना के विरोध में 4 नवंबर से वकीलों ने प्रदर्शन शुरू किया। वकील अपनी मांगों को लेकर लगातार दबाव बना रहे हैं और आंदोलन तेज करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वकीलों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे आंदोलन जारी रखेंगे।
