‘एक देश, एक चुनाव’ का संविधान संशोधन बिल सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि इसे पास कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत की जरूरत है। एनडीए के पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों में दो-तिहाई बहुमत नहीं है। इसके अलावा, विपक्षी दलों के ‘इंडिया गठबंधन’ ने इसका कड़ा विरोध किया है।
क्या है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल?
यह बिल पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की योजना पर आधारित है। सितंबर में केंद्रीय कैबिनेट ने इस विधेयक को मंजूरी दी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया। बीजेपी और सहयोगी दल इसके समर्थन में हैं।
बिल पास कराने के लिए जरूरी संख्या
1. लोकसभा: कुल 543 सीटों में से एनडीए के पास 292 सीटें हैं, जबकि दो-तिहाई बहुमत के लिए 362 सीटों की आवश्यकता है।
2. राज्यसभा: 245 सीटों में एनडीए के पास 112 सीटें हैं, जिनमें 6 मनोनीत सांसदों का समर्थन शामिल है। लेकिन, दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सीटें चाहिए।
क्या है सरकार की रणनीति?
सरकार इसे संसद की संयुक्त समिति (JPC) को भेजने की योजना बना रही है। जेपीसी में बीजेपी का बहुमत रहेगा, जिससे इसे समर्थन मिल सकता है। बीजेडी जैसे कुछ दलों ने इस पर चर्चा की मांग की है, जिससे सरकार व्यापक सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।
निष्कर्ष
बिल पास कराने के लिए सरकार को न केवल बहुमत की जरूरत है, बल्कि विपक्षी दलों को सहमत करना भी एक बड़ी चुनौती होगी।
