बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ चल रहे मामले में अदालत ने 17 नवंबर को फैसला सुनाने की तारीख तय की है। उन पर 2024 में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने, प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं। आरोप है कि उनकी सरकार ने प्रदर्शन दबाने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों को गोली चलाने का आदेश दिया था, जिससे कई छात्रों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत से शेख हसीना को मौत की सजा देने की मांग की है, यह कहते हुए कि उन्होंने “मानवता के खिलाफ अपराध” किए हैं। हालांकि, शेख हसीना ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि यह मुकदमा राजनीति से प्रेरित है। वर्तमान में वे भारत में शरण लिए हुए हैं और इस पूरे मामले को “न्यायपालिका का मजाक” बता रही हैं। बांग्लादेश में इस फैसले को लेकर माहौल बेहद तनावपूर्ण है। उनकी पार्टी अवामी लीग के समर्थक और विपक्षी दल आमने-सामने हैं। राजधानी ढाका और कई शहरों में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने देशभर में बंद और विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। कई स्कूल और कॉलेज ऑनलाइन मोड में चले गए हैं और सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हुआ है। इस मामले का असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश की न्याय प्रणाली, लोकतंत्र और स्थिरता पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। अदालत का फैसला देश के भविष्य की दिशा तय करेगा।
शेख हसीना को मिल सकती है मौत की सजा, बांग्लादेश अदालत 17 नवंबर को सुनाएगी बड़ा फैसला
