बिसरख कोतवाली में एक अनोखी घरेलू विवाद की कहानी सामने आई है। दीपक और आरती (नाम बदला हुआ) पति-पत्नी हैं और दोनों ही आईआईएम से एमबीए हैं। दोनों मलेशिया की एक निजी कंपनी में अच्छी नौकरी करते हैं और मोटी तनख्वाह पाते हैं। आमदनी अच्छी होने के बावजूद घर और बाहर के खर्च को लेकर उनका झगड़ा तलाक तक पहुँच गया।
दीपक चाहता था कि होटल, रेस्टोरेंट और शॉपिंग के खर्च को दोनों आधा-आधा उठाएँ। शुरू में आरती अपने हिस्से का पैसा देती रही, लेकिन धीरे-धीरे वह विरोध करने लगी। आरती का कहना है कि पति ही घर और अन्य खर्च का पूरा बोझ उठाए। यही वजह रही कि दोनों के बीच आए दिन कहासुनी और विवाद होने लगे।
मामला तब और बढ़ गया जब यह विवाद बिसरख कोतवाली तक पहुँच गया। पुलिस ने दोनों को बैठाकर समझाने की कोशिश की, लेकिन मामला सुलझा नहीं। पुलिस के अनुसार, आरती अक्सर महिला सशक्तिकरण का हवाला देती थी और कहती थी कि आज के समय में महिलाएं भी पुरुषों के बराबर हैं, इसलिए खर्च साझा करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। वहीं, दीपक का कहना था कि खर्च बराबर बाँटना ही सही है।
घरेलू खर्च के इस साधारण विवाद ने पति-पत्नी के रिश्ते को इतना तनावपूर्ण बना दिया कि मामला तलाक तक पहुँच गया। यह कहानी इस बात की ओर भी इशारा करती है कि आज के समय में आर्थिक फैसलों और जिम्मेदारियों को लेकर पति-पत्नी के बीच संतुलन और समझ बेहद जरूरी है।
