संघर्ष इंसान को निखारता है, और आदर्श गौरव इसका बेहतरीन उदाहरण हैं। ‘माय नेम इज खान’, ‘मॉम’, ‘द वाइट टाइगर’ और ‘खो गए हम कहां’ जैसी फिल्मों में अपनी पहचान बनाने वाले आदर्श को यहां तक पहुंचने के लिए काफी मुश्किलों से गुजरना पड़ा। हाल ही में ‘सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव’ में नासिर शेख का किरदार निभाकर उन्होंने फिर से दर्शकों का दिल जीत लिया।
संघर्ष की शुरुआत
आदर्श का बचपन जमशेदपुर में बीता, लेकिन पिता के तबादले के बाद वे मुंबई आ गए। संगीत की ट्रेनिंग ले चुके आदर्श को पहली बड़ी पहचान ‘द वाइट टाइगर’ से मिली, जिसमें उन्होंने प्रियंका चोपड़ा और राजकुमार राव के साथ काम किया। लेकिन इस मौके से पहले उन्होंने कई महीने बिना काम के बिताए। वे बताते हैं, “पांच महीने तक मेरे पास कोई प्रोजेक्ट नहीं था। फिर एक दिन ‘वाइट टाइगर’ के ऑडिशन के लिए कॉल आई, और उसी ने मेरी जिंदगी बदल दी।”
मुंबई में बसने की चुनौती
मुंबई जैसे महंगे शहर में रहना आसान नहीं था। उनके पिता सेंट्रल बैंक में काम करते थे, और उन्हें बैंक की तरफ से जुहू में एक क्वार्टर मिला हुआ था। मगर दो साल बाद, जब पिता का ट्रांसफर छत्तीसगढ़ हो गया, तो वह घर छोड़ना पड़ा। जुहू में रह चुके आदर्श और उनके परिवार के लिए नए घर की तलाश चुनौती बन गई। उन्होंने अंधेरी, जोगेश्वरी, बोरीवली जैसे इलाकों में घर खोजा और आखिरकार दहिसर के रावल पाड़ा में एक किराए का घर लिया, जिसकी कीमत उनके माता-पिता वहन कर सकते थे।
लेकिन यह ठहराव स्थायी नहीं था। हर डेढ़-दो साल में किराया बढ़ जाता, और उन्हें फिर से घर बदलना पड़ता। आदर्श बताते हैं, “मुझे कभी भी घर जैसी स्थिरता महसूस नहीं हुई। बस जड़ें जमाने की कोशिश करता, और फिर किसी नई जगह जाना पड़ता। इस अस्थिरता ने हमें बंजारों की तरह बना दिया था।”
संघर्ष से सीखने का दौर
इस लगातार बदलते माहौल ने आदर्श को नई जगहों और अलग-अलग तरह के लोगों से परिचित कराया। स्कूल खार में था, कॉलेज जुहू में, और घर दहिसर में। उन्होंने सालों तक लोकल ट्रेन और बसों में सफर किया, जिससे उन्हें समाज के हर तबके के लोगों को समझने का मौका मिला। यही अनुभव बाद में उनके अभिनय में काम आया। वे कहते हैं, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं एक्टर बनूंगा, लेकिन मुझे लोगों को देखने, समझने और उनकी कहानियां सुनने में दिलचस्पी थी। जब भी कोई नया किरदार निभाने का मौका मिलता है—चाहे जुहू गली का टपोरी हो या बांद्रा का पॉश युवा—तो मेरे अनुभव मुझे मदद करते हैं।”
आज आदर्श गौरव ने बॉलीवुड और वेब सीरीज में अपनी जगह बना ली है, लेकिन उनकी सफलता के पीछे का संघर्ष ही उनकी असली ताकत है।
