एक सरकारी विश्वविद्यालय पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वहां से डॉक्टरी की डिग्री लेकर ऐसे छात्र निकल रहे हैं, जिन्हें सही इलाज की बेसिक जानकारी तक नहीं है। आरोप है कि परीक्षाओं में नकल, प्रैक्टिकल में फर्जी हाजिरी और पैसों के लेन–देन के जरिए डिग्रियां बांटी जा रही हैं।
विश्वविद्यालय से पास हुए कुछ डॉक्टरों ने बाहर जाकर क्लीनिक और अस्पताल खोल लिए। लेकिन मरीजों के परिवारों ने शिकायत की कि गलत दवा, गलत ऑपरेशन और इलाज में लापरवाही के चलते कई मरीजों की मौत हो गई। सोशल मीडिया और स्थानीय थानों में लगातार शिकायतें दर्ज हो रही हैं कि यह जगह इलाज नहीं, बल्कि मौत का केंद्र बन चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया कि:
बिना ट्रेनिंग के ऑपरेशन किए गए फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनाई गई एक्सपायरी दवाएं दी गईं भर्ती मरीजों की निगरानी नहीं हुई
स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और मेडिकल काउंसिल की संयुक्त टीम ने विश्वविद्यालय की मान्यता और रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। कुछ संदिग्ध डॉक्टरों के क्लीनिक सील किए जा चुके हैं, और पूछताछ जारी है।
सरकार ने कहा है कि फर्जी डिग्री और इलाज में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
