सिंधु जल संधि पर भारत के रुख से तिलमिलाया पाकिस्तान, ताजिकिस्तान सम्मेलन में शहबाज शरीफ ने गाजा संकट से की तुलना

ताजिकिस्तान | 30 मई 2025:
भारत द्वारा सिंधु जल संधि को आंशिक रूप से स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी साफ नजर आने लगी है। ताजिकिस्तान में आयोजित एक बहुपक्षीय सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत की इस रणनीतिक कार्रवाई की तुलना गाजा के जल संकट से कर दी, और भारत पर पानी को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया।

पानी रोकने से मचा पाकिस्तान में हाहाकार

भारत द्वारा सिंधु नदी पर नियंत्रण और संधि के कुछ प्रावधानों को रोकने के बाद पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है। इसी घबराहट के चलते प्रधानमंत्री शरीफ ने मंच से कहा,

“भारत सिंधु जल संधि के तहत मिलने वाले पानी को रोक कर उसे एक रणनीतिक हथियार के रूप में पाकिस्तान के खिलाफ प्रयोग कर रहा है। यह स्थिति गाजा जैसे जल संकट के समान गंभीर है और इसे पाकिस्तान कभी स्वीकार नहीं करेगा।”

गीदड़भभकी के साथ दिखी बेबसी

शहबाज शरीफ ने भारत को चेताते हुए कहा कि पाकिस्तान इस संधि की “लाल रेखा” पार नहीं करने देगा। लेकिन उनका यह बयान राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश से ज्यादा कुछ नहीं माना जा रहा, क्योंकि भारत ने यह कदम पाकिस्तान की लगातार आतंकी गतिविधियों और समझौते के दुरुपयोग की प्रतिक्रिया में उठाया है।

सिंधु जल संधि: एक ऐतिहासिक समझौता

  • यह संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी।

  • इसके अंतर्गत भारत ने सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों के जल का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान को देने पर सहमति जताई थी।

  • लेकिन पाकिस्तान की ओर से लगातार आतंकवाद और सीमा पर उकसावे की गतिविधियों के कारण भारत में यह मांग उठी कि “अब खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।”

पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय गिड़गिड़ाहट

ताजिकिस्तान में शरीफ द्वारा यह मसला उठाना इस बात का प्रतीक है कि पाकिस्तान अब दुनिया के नेताओं की सहानुभूति हासिल कर भारत पर दबाव बनाना चाहता है। लेकिन वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में पाकिस्तान की यह रणनीति ज्यादा असरकारी नहीं दिख रही है।

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