सुप्रीम कोर्ट में राजनीतिक दलों को RTI के तहत लाने की मांग

सुप्रीम कोर्ट में राजनीतिक दलों को RTI के तहत लाने की मां

आज (21 अप्रैल 2025) सुप्रीम कोर्ट में एक अहम याचिका पर सुनवाई हो रही है। इस याचिका में मांग की गई है कि राजनीतिक दलों को भी RTI यानी सूचना का अधिकार कानून के तहत लाया जाए।

क्या है मामला?

RTI कानून के तहत आम नागरिक किसी भी सरकारी विभाग से जानकारी मांग सकते हैं।

लेकिन राजनीतिक दलों पर यह कानून अभी लागू नहीं होता, इसलिए लोग उनसे जानकारी नहीं ले सकते — जैसे फंडिंग कहां से आ रही है, पार्टी का खर्चा कैसा है, उम्मीदवार कैसे तय होते हैं आदि।

याचिका में क्या कहा गया?

याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक दल “जनहित में काम करने वाले संस्थान” हैं और उन्हें भी पारदर्शिता के तहत जनता को जवाब देना चाहिए।

पहले क्या हुआ था?

2013 में केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने 6 बड़े राष्ट्रीय दलों को RTI के तहत लाने का आदेश दिया था।

लेकिन इन दलों ने इसे मानने से इनकार कर दिया और सुप्रीम कोर्ट में मामला चला गया।

आज की सुनवाई क्यों अहम है?

अगर सुप्रीम कोर्ट ये फैसला करता है कि राजनीतिक दलों को RTI के तहत लाना चाहिए, तो

पार्टियों को अपनी फंडिंग, टिकट बांटने के तरीके और आंतरिक कामकाज के बारे में जानकारी देनी पड़ेगी।

इससे भ्रष्टाचार कम करने में मदद मिल सकती है और जनता का भरोसा बढ़ेगा।

यह मुद्दा लोकतंत्र और पारदर्शिता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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