25 जुलाई 2025 को नेपाल सीमा के आसपास स्थित कई अवैध मदरसों (विशेषकर मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, बायपट्टी, देमा गांव) का खुलासा किया, जहां हवाला चैनल के जरिए खाड़ी देशों से पैसा लाकर बच्चों को जिहाद और कट्टरवादी सोच की शिक्षा दी जा रही थी ।
टीम ने एक मदरसे के शिक्षक से छिपकर बातचीत की, जिसमें उसने स्वीकार किया कि हवाला से पैसा मिलता है और इसका इस्तेमाल “एक अलग फैकल्टी” चलाने के लिए होता है, ताकि बच्चों को धीरे‑धीरे ब्रेनवॉश कर जिहाद की सोच दी जा सके । मदरसे के इंचार्ज ने बताया कि भारत में फर्जी भारतीय IDs वाले बांग्लादेशी बच्चे भी दाखिला लेते हैं, और इनमें “भगोड़ा” जाकिर नाइक के वीडियो दिखाये जाते हैं, तथा विवादास्पद किताब ‘तालीम‑उल‑इस्लाम’ से धार्मिक घोर कट्टरता भरी शिक्षा दी जाती है ।
ये मदरसे ना तो किसी सरकारी निकाय से मान्यता प्राप्त हैं, ना इनके छात्रों या शिक्षक‑कर्मियों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड है। ऐसा माना जाता है कि इन मदरसों के संचालन में कोई सरकारी निगरानी नहीं है, जिससे बच्चों की शिक्षा और भविष्य दोनों जोखिम में हैं ।
Nepal की ओर भी ऐसी तस्वीरे सामने आईं हैं। वहां के मदरसों में भी विदेशी पैसे, विदेशी वक्ता और कट्टरवादी शिक्षण शामिल हैं, जिनमें महत्तारी और आसपास के जिलों के शिक्षण केंद्र शामिल हैं कि “विदेशी भाषणों और हवाला फंडिंग के माध्यम से युवाओं को धोखा दिया जा रहा है”
उधर, उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत–नेपाल सीमा से सटे तीन‑किलोमीटर से लेकर पंद्रह‑किलोमीटर तक के क्षेत्रों में गैरकानूनी मदरसों, मस्जिदों और मजारों पर बारिश की कार्रवाई शुरू कर दी है। अनेक मामलों में सरकारी जमीन पर कब्जा करके संचालित ये संस्थान सील या ध्वस्त कर दिए गए हैं। सात जिलों (जैसे शरावस्ती, बहराइच, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी, पालीभित) में अभियान जारी है, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देशित किया है ।
इस विवादास्पद खुलासे से साफ होता है कि बिहार‑नेपाल सीमा क्षेत्र में कट्टर व धार्मिक असहिष्णुता को हवा देने वाले मदरसे संचालित हो रहे हैं, जिन्हें हवाला के माध्यम से विदेशी फंडिंग मिल रही है। ये संस्थान पूर्णतया निगरानी से बाहर, बिना रजिस्ट्रेशन, बिना पहचान, और बिना मान्यता की स्थिति में बच्चों को जोखिम में डाल रहे हैं।
