जॉनी वॉकर, हिंदी सिनेमा के ऐसे महान कलाकार, जिन्होंने अपनी अनोखी अदाकारी और हास्य के जादू से लाखों दिल जीते। उनका असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी था, लेकिन फिल्मी दुनिया में उन्हें जॉनी वॉकर के नाम से पहचान मिली। भले ही वह पर्दे पर अक्सर शराबी का किरदार निभाते थे, लेकिन असल ज़िंदगी में उन्होंने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया।
मुंबई आने के बाद उन्होंने बस कंडक्टर की नौकरी शुरू की, जहां उनकी हाज़िरजवाबी और मज़ाकिया अंदाज़ यात्रियों का मनोरंजन करता। यही हुनर उनकी किस्मत का दरवाज़ा खोल गया। एक दिन उनकी मुलाकात मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार से हुई, जिन्होंने उनके टैलेंट को पहचाना और उनकी सिफारिश से उन्हें “बाज़ी” फिल्म में काम मिला।
1950 और 60 के दशक में जॉनी वॉकर हिंदी सिनेमा के सबसे चहेते कॉमेडियन बन गए। उनकी हिट फिल्मों में टैक्सी ड्राइवर, प्यासा, चौदहवीं का चांद, और मिस्टर एंड मिसेज 55 शामिल हैं। उन्होंने गुरु दत्त जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया और हर बार अपने किरदार को ऐसा जीवंत बनाया कि दर्शक उनके बिना फिल्म की कल्पना नहीं कर सकते थे।
300 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके जॉनी वॉकर को उनकी कॉमिक टाइमिंग और बेमिसाल अंदाज़ के लिए याद किया जाता है। मुगल-ए-आज़म जैसी ऐतिहासिक फिल्म में उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ हंसी के लिए नहीं, बल्कि गंभीर भूमिकाओं में भी अपनी छाप छोड़ सकते हैं।
उनका सफर मेहनत, लगन, और टैलेंट का अद्भुत उदाहरण है। आज भी उनके किरदार सिनेमा प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं।
