51 करोड़ की जीएसटी कर चोरी का भंडाफोड़, बिसरख पुलिस ने दो आरोपी गिरफ्तार

बिसरख कोतवाली पुलिस ने जीएसटी रिफंड में बडे पैमाने पर चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड करते हुए दो आरोपियों को गिराफ्तार किया। आरोपियों को पतवाड़ी इलाके से पकड़ा गया। पूछताछ में दोनों ने माना कि वे मिलकर नकली केवाईसी बनाते, फर्जी फर्मों का पंजीकरण कराते और उन फर्मों के नाम पर बैंक खाते खोलवा कर आईटीसी रिफंड के जरिए अवैध धन इकट्ठा करते थे। पिछले पांच सालों में गिरोह ने जाली दस्तावेजों के सहारे कई फर्जी कंपनियाँ खड़ी कर दीं और करोड़ों रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट के नाम पर रिफंड ले लिए। जांच के दौरान आरोपियों के पास से 10 नकली सील-मोहर, आधार कार्ड, चेक बुक, अकाउंट खोलने के फॉर्म और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने 85 फर्जी फर्मों के जरिए करीब 51 करोड़ रुपये के आईटीसी दावे किए और लगभग 350 करोड़ रुपये के नकली बिल तैयार कर दिए गए थे।

20 जून से 6 नवम्बर के बीच में छह खातो में कई करोड़ो का लेनदेन

डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों का नाम प्रवीन कुमार निवासी सलोनी थाना बहादुरगढ़ और सतेन्द्र सिंह निवासी बिघराऊ थाना स्याना है। दोनों ने अपनी-अपनी तस्वीरें लगाकर फर्जी आधार, पैन और रेंट एग्रीमेंट तैयार किए। इन दस्तावेजों से उद्यम पंजीकरण और जीएसटी पंजीकरण कराकर कई बैंक खाते सक्रिय कराए गए। इसके अलावा गिरोह ने बैंक ऑफ इंडिया की गाजियाबाद व गौतमबुद्धनगर की कई शाखाओं में कई प्रमुख फर्मों के नाम पर खाते खोले थे जिनमें रिद्धि सिद्धि एंटरप्राइजेज, भवानी इम्पेक्स, झलक एंटरप्राइजेज, गौरव एंटरप्राइजेज, दामिनी इंडिया इंटरनेशनल और राधिका एंटरप्राइजेज शामिल हैं। बताया जा रहा है कि 20 जून से 6 नवम्बर के बीच इन छह खातों में कुल 3,42,77,254 रुपये का लेनदेन हुआ। खातों के संचालन के लिए गिरोह ने नौ मोबाइल नंबर और 18 उपकरण उपयोग किए, जिनपर कुल 87 सिम कार्ड थे। व्हाट्सऐप कॉल और ईमेल के जरिए संवाद कर ट्रैकिंग से बचने की कोशिश की गई। पुलिस का मानना है कि इसमे और लोग भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल दोनो आरोपियों से पुछताछ की जा रही हैं।

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