राजस्थान के अलवर जिले से साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां ठगों ने एक बुजुर्ग महिला को 7 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 1 करोड़ 25 लाख रुपये की ठगी कर ली। इस मामले में पुलिस ने अब एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। घटना ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के नए-नए हथकंडों को उजागर कर दिया है।
पुलिस के अनुसार, ठगों ने खुद को ED (प्रवर्तन निदेशालय) और CBI अधिकारी बताकर महिला को फोन किया। उन्होंने दावा किया कि महिला के बैंक अकाउंट से मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध लेन-देन जुड़ा हुआ है। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर ठगों ने महिला को मानसिक दबाव में रखा और उसे किसी से बात न करने की चेतावनी दी। इसी डर के चलते महिला को लगातार वीडियो कॉल और फोन के जरिए डिजिटल अरेस्ट में रखा गया।
ठगों ने महिला से कहा कि जांच पूरी होने तक वह घर से बाहर नहीं जा सकती और न ही किसी रिश्तेदार या पुलिस से संपर्क कर सकती है। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया गया। महिला ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी और निवेश मिलाकर कुल 1.25 करोड़ रुपये ठगों के बताए खातों में डाल दिए। सात दिनों बाद जब महिला को शक हुआ, तब उसने परिजनों को जानकारी दी और मामला पुलिस तक पहुंचा।
अलवर साइबर सेल ने जांच शुरू कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिससे पूछताछ में ठगी के नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस का कहना है कि यह एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह हो सकता है, जिसमें कई लोग अलग-अलग भूमिकाओं में शामिल हैं। अन्य आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
पुलिस ने आम लोगों, खासकर बुजुर्गों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। ऐसे कॉल आने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। यह मामला साइबर ठगी के बढ़ते खतरे और जागरूकता की जरूरत को साफ तौर पर दर्शाता है।
