भारत में शादियां केवल समारोह नहीं होतीं, बल्कि यह पवित्र अनुष्ठानों और भावनाओं का उत्सव है। इन्हीं रस्मों में से एक है कलीरा समारोह, जो पंजाबी शादियों की खास पहचान है। अब यह उत्तर भारत की अन्य शादियों में भी प्रचलित हो गया है।
कलीरा क्या है?
कलीरे खास गहने होते हैं, जो दुल्हन की चूड़ियों से लटके होते हैं। ये न सिर्फ दुल्हन की खूबसूरती बढ़ाते हैं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखते हैं। मान्यता है कि शादी के बाद दुल्हन कलीरों को अपनी अविवाहित बहनों या दोस्तों के ऊपर झाड़ती है। जिस पर कलीरा गिरता है, उसकी शादी जल्द होने की बात मानी जाती है।
कलीरों का फैशन
पहले कलीरे केवल पंजाबी दुल्हनें पहनती थीं, लेकिन अब यह हर धर्म और समुदाय की शादियों में लोकप्रिय हो गया है। अब बाजार में लहंगे से मैचिंग डिजाइनर कलीरे भी उपलब्ध हैं। दुल्हनें अपनी पसंद और फैशन के अनुसार भारी-भरकम या हल्के कलीरे चुनती हैं।
कलीरों की कीमत
कलीरे मेटल से बनाए जाते हैं और उन्हें मोती, नग, और मीना से सजाया जाता है। साधारण कलीरे 500 रुपये में मिलते हैं, जबकि डिजाइन और लंबाई के आधार पर इनकी कीमत 6000 रुपये तक हो सकती है।
दिल्ली के चांदनी चौक जैसे बाजारों में कलीरों की आकर्षक वैरायटी मिलती है, जो शादियों की शान बढ़ा देती हैं।
