बिहार विधानसभा में आरक्षण का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जब वे सरकार में थे, तब जातीय आधारित जनगणना कराई गई थी, क्योंकि राज्य सरकार खुद जनगणना नहीं करा सकती। उस जनगणना के आधार पर आरक्षण की सीमा 65% तक बढ़ाई गई थी। इसमें पिछड़े, अति पिछड़े, दलित, आदिवासी और EWS वर्ग को शामिल किया गया था।
तेजस्वी यादव ने कहा कि इस कानून को 2023 में लागू किया गया, लेकिन 2024 में हाईकोर्ट ने इसे रद्द कर दिया। उनका आरोप है कि भाजपा ने जानबूझकर इसे कोर्ट में चुनौती दिलाई। उन्होंने विधानसभा में मांग की कि सरकार इस पर गंभीरता दिखाए और कानून में जरूरी बदलाव करके इसे फिर लागू करे। साथ ही, विधानसभा की एक कमेटी बनाकर इसे स्टडी कराने की बात भी कही।
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने तेजस्वी यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि बिना प्रमाण के बातें करना सही नहीं है। वहीं, विजय कुमार चौधरी ने कहा कि यह कानून नौंवी अनुसूची में डाला जाना चाहिए था, ताकि इसे अदालत में चुनौती न दी जा सके। लेकिन बीच में मामला कोर्ट चला गया और कानून रद्द हो गया।
