अजमेर में ख्वाजा साहब की दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे वाली याचिका कोर्ट में स्वीकार होने के बाद से विवाद खड़ा हो गया है। इस पर भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के नेता अलग-अलग बयान दे रहे हैं।
दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन ने कहा कि दरगाह का इतिहास 800 साल पुराना है और उस समय यहां कच्चा निर्माण था। उन्होंने कहा कि अगर यहां मंदिर होता, तो वो कच्चे मजार के नीचे कैसे हो सकता था? उन्होंने यह भी कहा कि 1991 का पूजा स्थल अधिनियम सभी धार्मिक स्थानों पर लागू है और सरकार किसी भी धार्मिक स्थल के साथ ऐसा नहीं कर सकती।
दरगाह दीवान ने यह भी बताया कि 1950 में एक आयोग ने दरगाह का इतिहास जांचा था, और 1829 में कर्नल जेम्स टॉड ने भी दरगाह का पूरा विवरण दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दरगाह का इतिहास पहले ही साफ किया गया था।
अंजुमन दरगाह कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह एक धार्मिक स्थान है और हर किसी को ऐसे मामलों में दखल नहीं देना चाहिए।
