नीतीश रेड्डी का ऐतिहासिक शतक: मेलबर्न में भारत को संकट से उबारा

हीरो बनने के लिए कभी-कभी असामान्य परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। जब सारा माहौल आपके खिलाफ हो, तब खुद को साबित करना ही असली हीरो बनाता है। फिल्में तो हम सब देखते हैं, जहां हीरो हर चुनौती का सामना करता है। लेकिन जब असली विलेन सामने हो, और वह आपके अपनों को अपने जाल में फंसा ले, तब अगर आप उसे हराकर सबको बचा लाते हैं, तो यही असली हीरोइज्म है।

 

बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के चौथे टेस्ट में टीम इंडिया का हाल गंभीर था। बड़े-बड़े खिलाड़ी जैसे रोहित, विराट, और राहुल पवेलियन लौट चुके थे, और ऑस्ट्रेलिया ने 474 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। जब भारत ने ऋषभ पंत को खो दिया, तो सुनील गावस्कर भी घबराए हुए थे, लेकिन उसके बाद जो हुआ, वह असली क्रिकेट ड्रामा था।

 

आंध्र प्रदेश के मुत्याला रेड्डी, जो हिंदुस्तान जिंक कंपनी में काम करते थे, ने देखा कि उनका बेटा नीतीश क्रिकेट खेल रहा है। तब उन्हें महसूस हुआ कि नीतीश कुछ बड़ा करेगा। जब रेड्डी का ट्रांसफर उदयपुर हुआ, तो उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी ताकि नीतीश का क्रिकेट करियर न बिगड़े, हालांकि इसके लिए उन्हें काफ़ी ताने और पैसे की तंगी का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने बेटे की क्रिकेट में सफलता पर ध्यान केंद्रित किया।

 

मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में 70,000 दर्शकों के बीच नीतीश रेड्डी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी विकेट की साझेदारी में शतक बनाया और भारत को संकट से उबारा। उनके पिता मुत्याला रेड्डी भी दर्शकों में मौजूद थे, और यह पल इतना खास था कि इंटरव्यू लेने खुद आदम गिलक्रिस्ट पहुंचे।

 

नीतीश का शतक एक बड़े ट्विस्ट के साथ आया। जब वह 99 रन पर थे, और बुमराह आउट हो गए, तो मोहम्मद सिराज ने तीन गेंदों पर कड़ा संघर्ष किया। फिर अगले ओवर में नीतीश ने स्कॉट बोलैंड के ऊपर से शॉट मारकर अपना ऐतिहासिक शतक पूरा किया।

 

इस शतक के साथ नीतीश ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट शतक बनाने वाले भारत के तीसरे सबसे युवा बल्लेबाज बन गए। पहले नंबर पर सचिन तेंदुलकर और दूसरे नंबर पर ऋषभ पंत हैं। नीतीश की बल्लेबाजी में सचिन की झलक नजर आई, और इस शतक के साथ उन्होंने साबित कर दिया कि क्रिकेट में हर खिलाड़ी का एक खास पल होता है।

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