इस साल भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है। 2024 के अंत तक रुपया 85.59 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर पहुंच गया, जो जनवरी में 83.19 प्रति डॉलर था। इस साल रुपया तीन प्रतिशत गिर चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती, रूस-यूक्रेन युद्ध, और पश्चिम एशिया में संकट जैसे कारणों ने रुपये पर दबाव डाला है। इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और चीन की आर्थिक सुस्ती ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।
हालांकि, रुपये में कमजोरी के बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपये की गिरावट को रोकने के लिए सक्रिय प्रयास किए हैं। विदेशी मुद्रा भंडार में कमी का सामना करते हुए भी, रुपये की स्थिति अन्य मुद्राओं के मुकाबले बेहतर रही है। खासकर, यूरो और जापानी येन के मुकाबले रुपये ने मजबूती दिखाई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 2025 में रुपये की स्थिति में सुधार हो सकता है, और आरबीआई की रणनीतियों के चलते रुपये में स्थिरता देखी जा सकती है।
