भारत में बच्चों की संपत्ति पर माता-पिता का अधिकार होता है, लेकिन यह अधिकार कुछ खास परिस्थितियों में ही लागू होता है। अगर कोई बच्चा असमय मृत्यु का शिकार हो जाता है या अविवाहित होने पर वसीयत छोड़े बिना मर जाता है, तो इस स्थिति में माता-पिता को उसकी संपत्ति पर दावा करने का अधिकार मिलता है।
कानूनी दृष्टिकोण:
कानून के अनुसार, बच्चे की संपत्ति पर दावा करने का पहला अधिकार मां को होता है। अगर मां नहीं है, तो पिता को संपत्ति पर अधिकार मिलता है। हालांकि, इस स्थिति में दोनों के अधिकार अलग-अलग होते हैं।
लड़का या लड़की होने पर कानून में अंतर:
1. लड़के की संपत्ति:
अगर लड़का अविवाहित था और उसकी मृत्यु हो गई, तो उसकी मां को पहले हक मिलेगा। अगर मां की मृत्यु हो चुकी है, तो पिता और अन्य वारिसों के बीच संपत्ति बांटी जाएगी।
2. लड़की की संपत्ति:
अगर लड़की का कोई बच्चा नहीं है, तो उसके पति को संपत्ति का हक मिलेगा। यदि पति भी नहीं है, तो संपत्ति पर दावा करने का अधिकार उसके माता-पिता को होगा।
कानूनी रूप से, माता-पिता को बच्चे की संपत्ति पर अधिकार तब मिलता है जब बच्चा अविवाहित और बिना वसीयत के मर जाता है। इस अधिकार को लेकर माता-पिता का आदेश हमेशा पहले मां के पक्ष में होता है, उसके बाद पिता का।
