पिछले 20 दिनों से बिहार की राजनीति में उथल-पुथल का माहौल है। राजनीतिक दलों के बीच समीकरण बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने नए साल पर बयान दिया कि नीतीश कुमार के लिए राजद का दरवाजा खुला है। हालांकि, उनके बेटे तेजस्वी यादव ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। इसके बाद इंडिया ब्लॉक में नीतीश कुमार को लेकर चर्चाओं पर विराम लग गया।
नीतीश की चुप्पी और कयास
अमित शाह ने एक टीवी कार्यक्रम में एनडीए के भीतर दरार की संभावनाओं को खारिज किया, लेकिन नीतीश कुमार के चुप रहने से अटकलें तेज हो गईं। उनकी तबीयत खराब होने की खबरें भी आईं। इसके बीच, दिल्ली दौरे पर गए नीतीश की पीएम मोदी और जेपी नड्डा से मुलाकात की बातें की गईं, पर उन्होंने केवल पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के परिवार से शोक जताने का समय निकाला।
जेडीयू का सीटों का गणित
नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने विधानसभा चुनावों के लिए सीटों का नया फार्मूला तैयार किया है। वे 122 सीटें चाहते हैं, जबकि भाजपा को 121 पर रोकना चाहते हैं। इसके लिए हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को अपने हिस्से से सीटें देने का विचार है। वहीं, चिराग पासवान से निपटने की जिम्मेदारी भाजपा पर डाल दी गई है।
भाजपा-जेडीयू के बीच बढ़ती दूरियां?
चिराग पासवान ज्यादा सीटों की मांग करेंगे, जिससे भाजपा की सीटें कम हो सकती हैं। जेडीयू 110-115 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहता है। यह रणनीति भाजपा के दबदबे को सीमित करने की कोशिश मानी जा रही है।
बिहार की राजनीति में ये बदलते समीकरण आगे क्या मोड़ लेते हैं, यह देखने लायक होगा।
