बीते महीनों में वायु प्रदूषण के कारण दिल्लीवासियों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। सड़कों, गलियों और कॉलोनियों में अतिक्रमण बेतहाशा बढ़ रहा है, लेकिन सरकार इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही। रोजगार के अवसर सीमित हैं, नए स्कूल और अस्पताल नहीं बन रहे, और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर भी उदासीनता दिख रही है।
हालांकि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मुफ्त सेवाओं और योजनाओं को ही अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते रहे, लेकिन वे यह भूल गए कि दिल्ली का मतदाता सिर्फ मुफ्त योजनाओं से संतुष्ट नहीं होता। यह एक जागरूक और शिक्षित समाज है, जिसे मूलभूत सुविधाओं की भी जरूरत है। आम जनता, विशेषकर मध्य वर्ग, प्रदूषण, भ्रष्टाचार, सफाई और पानी जैसी समस्याओं से जूझती रही, लेकिन सरकार ने इन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया। यही कारण रहा कि इन चुनावों में जनता ने अपनी नाराजगी जाहिर की और चुनाव परिणामों में इसका सीधा असर दिखा। चुनाव बाद के सर्वेक्षणों से भी स्पष्ट हुआ कि मुफ्त योजनाओं के बजाय लोगों ने बुनियादी सुविधाओं और सुशासन को प्राथमिकता दी, जिससे केजरीवाल को हार का सामना करना पड़ा।
