हजारीबाग के हुटपा निवासी किसान मुकेश कुमार सिंह एक बड़े साइबर और वित्तीय घोटाले का शिकार हो गए हैं। अज्ञात लोगों ने उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन और कंपनी बना ली। इस कंपनी के नाम पर लगभग 54 करोड़ रुपये का कोयला बेचा गया, जिसका खुलासा तब हुआ जब बनारस जीएसटी विभाग ने मुकेश को नोटिस भेज दिया।
न्याय की तलाश में भटकता किसान
मुकेश कुमार सिंह, जो अपनी छोटी-सी खेती से परिवार का गुजर-बसर करते हैं, अचानक इस घोटाले में फंस गए। नोटिस मिलने के बाद वे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला। यह मामला न केवल एक बड़े वित्तीय घोटाले को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा में लापरवाही आम लोगों की जिंदगी बर्बाद कर सकती है।
कैसे हुआ खुलासा?
मुकेश को जब बनारस जीएसटी विभाग से नोटिस मिला, तो वे घबरा गए।
एक जानकार की मदद से उन्होंने हजारीबाग के एक सीए और जीएसटी अधिकारियों से संपर्क किया।
जांच में पता चला कि उनके पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों का दुरुपयोग कर गणेश इंटरप्राइजेज नाम की फर्जी कंपनी बनाई गई।
इस फर्जी कंपनी के जरिए शिवगंगा कोल ट्रेडर्स और जय मां भद्रकाली ट्रांसपोर्ट एंड कोल कंपनी कोयला खरीद चुकी थीं।
कैसे हुई धोखाधड़ी?
तीन साल पहले कुछ अज्ञात लोग मुकेश के पास पहुंचे और क्रेडिट कार्ड बनवाने का लालच दिया।
उन्होंने विश्वास में आकर अपने पैन कार्ड और आधार कार्ड दे दिए।
बाद में उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनी बना ली गई, जिसमें फर्जी ईमेल, फर्जी मोबाइल नंबर और गलत पता दर्ज किया गया।
2022 से नवंबर 2024 तक हजारों टन कोयले की खरीद-बिक्री की गई।
पुलिस कार्रवाई और आरोपियों के नाम
इस मामले में मुफस्सिल थाना में कांड संख्या 16/25 के तहत केस दर्ज हो चुका है। मुकेश कुमार सिंह ने एफआईआर में तीन लोगों को आरोपी बनाया है:
1. अरुणीमा मिश्रा (शिवगंगा कोल ट्रेडर्स की मालिक)
2. बीजेंद्र यादव (जय मां भद्रकाली ट्रांसपोर्ट एंड कोल कंपनी का मालिक)
3. बीरेंद्र कुमार गुप्ता
सरकारी चेतावनी
हजारीबाग में केंद्रीय जीएसटी के सहायक आयुक्त राज कुमार प्रसाद ने बताया कि इस तरह के कई फ्रॉड मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने सभी नागरिकों को चेतावनी दी कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने पैन कार्ड, आधार कार्ड या अन्य दस्तावेज देने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें।
क्या सबक मिला?
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि साइबर अपराधी अब किसानों और आम नागरिकों को भी निशाना बना रहे हैं। दस्तावेजों की सुरक्षा बेहद जरूरी हो गई है, वरना किसी को भी झूठे आरोपों और कानूनी झंझट में फंसाया जा सकता है। फिलहाल, पुलिस इस घोटाले की गहराई से जांच कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई होगी।
