भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में नया मोड़: ट्रंप और मोदी की अहम बैठक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही वैश्विक व्यापार प्रणाली में हलचल मच गई। इसी दौरान, 14 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी 36 घंटे की अमेरिकी यात्रा पूरी की। ट्रंप आमतौर पर व्यापार में आयात शुल्क (टैरिफ) के समर्थक माने जाते हैं, लेकिन भारत के मामले में उनका रुख अलग नजर आया। पहले उन्होंने भारत को “व्यवसाय के लिए कठिन देश” बताया, फिर कुछ ही घंटों बाद “भारत के साथ कई बड़ी व्यापारिक डील” की बात कह डाली।

व्यापार को लेकर ट्रंप का रुख

मीडिया को संबोधित करते हुए ट्रंप ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी व्यापार वार्ता के लिए सहमत हुए हैं और भारत, अमेरिका से तेल, गैस और लड़ाकू विमानों की खरीद बढ़ाने को तैयार है। हालांकि, इससे पहले उन्होंने भारत पर ऊंचे टैरिफ लगाने का आरोप लगाया था और कहा था कि कई बार अमेरिका के सहयोगी देश उसके विरोधियों से भी ज्यादा कठिन साबित होते हैं।

ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका “रेसिप्रोकल टैरिफ” (पारस्परिक शुल्क) लागू करेगा, यानी अमेरिका उतना ही टैरिफ वसूलेगा, जितना दूसरे देश उस पर लगाते हैं। यह नीति तुरंत लागू नहीं होगी, ताकि अन्य देशों को अमेरिका के साथ नए व्यापार समझौते करने का समय मिल सके।

भारत-अमेरिका व्यापार संतुलन

वर्तमान में अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा 45.6 बिलियन डॉलर (लगभग 3.8 लाख करोड़ रुपये) है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका का औसत टैरिफ 2.2% है, जबकि भारत का औसत टैरिफ 12% है। ट्रंप के अनुसार, भारत कुछ उत्पादों पर 30%, 40%, 60% और 70% तक शुल्क लगाता है, जिससे अमेरिका को नुकसान होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मोदी सरकार टैरिफ को कम करने की दिशा में काम कर रही है।

मोदी और ट्रंप इस बात पर सहमत हुए कि 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर (41.5 लाख करोड़ रुपये) तक बढ़ाया जाएगा। ट्रंप ने आश्वासन दिया कि अमेरिका भारत के साथ कुछ बेहतरीन व्यापार समझौतों पर काम कर रहा है।

रक्षा और ऊर्जा सहयोग

अमेरिका ने भारत को उन्नत F-35 स्टील्थ फाइटर जेट देने की पेशकश की और जल्द ही अरबों डॉलर के सैन्य उपकरण बेचने की बात कही। इसके अलावा, दोनों देशों ने एक ऊर्जा समझौता किया, जिसके तहत अमेरिका भारत को तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ाएगा।

ट्रंप ने यह भी बताया कि भारत अमेरिकी परमाणु तकनीक को अपनाने के लिए अपने कानूनों में बदलाव कर रहा है। इससे भारत में करोड़ों लोगों को सस्ती और सुरक्षित बिजली मिलेगी, जबकि अमेरिकी परमाणु उद्योग को भी आर्थिक लाभ होगा। भारत सरकार ने 2025 के बजट में “नेशनल न्यूक्लियर एनर्जी मिशन” के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है ताकि ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।

ट्रंप और मोदी की रणनीति

ट्रंप को कड़े सौदेबाजी करने वाले नेता के रूप में जाना जाता है, लेकिन इस बार उनका रवैया कुछ अलग दिखा। उन्होंने मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वे उनसे भी बेहतर सौदेबाज हैं। ट्रंप ने कहा, “वे मुझसे ज्यादा मजबूत नेगोशिएटर हैं। वे मुझसे कहीं बेहतर हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है।”

कुल मिलाकर, इस दौरे में व्यापार, रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होने की उम्मीद है।

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