भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और बांग्लादेश सरकार के विदेश नीति सलाहकार तौहीद हुसैन की मुलाकात काफी अहम रही। यह मुलाकात इसलिए खास थी क्योंकि बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद यह पहली बार हुआ कि दोनों देशों के उच्च स्तर के अधिकारी आपस में मिले।
हालांकि, इस बातचीत से यह साफ हुआ कि भारत और बांग्लादेश की विदेश नीति अब अलग-अलग दिशा में जा रही है। मस्कट में हुए हिंद महासागर सम्मेलन में हुसैन ने भारत से कहा कि वह सार्क (SAARC) की बैठक फिर से शुरू करने दे, जबकि जयशंकर ने बिमस्टेक (BIMSTEC) के तहत सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
भारत क्यों नहीं चाहता सार्क की बैठक?
2016 में उरी हमले के बाद भारत ने सार्क की बैठक रोक दी थी, ताकि पाकिस्तान को अलग-थलग किया जा सके। इसके अलावा, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत कुछ देशों ने सार्क में चीन को पर्यवेक्षक (Observer) का दर्जा देने की मांग की थी, जो भारत को पसंद नहीं आई। इसी कारण भारत ने सार्क की जगह बिमस्टेक को बढ़ावा देना शुरू किया।
बांग्लादेश अब पाकिस्तान के करीब?
बांग्लादेश की सरकार बदलने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्ते खराब होते गए। यहां तक कि सीमा पर तनाव भी बढ़ गया। लेकिन अब इसे सुधारने की कोशिशें हो रही हैं। जयशंकर और हुसैन की मुलाकात के ठीक बाद दोनों देशों के सीमा रक्षक बलों की बैठक भी होने वाली है, जो एक अच्छा संकेत है।
हालांकि, यह भी देखा जा रहा है कि बांग्लादेश की विदेश नीति अब भारत के बजाय पाकिस्तान के ज्यादा करीब जाती दिख रही है। सार्क बैठक की वकालत करना भी इसी बदले हुए रुख का संकेत माना जा सकता है।
