शशि थरूर और कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरियां अब किसी से छिपी नहीं हैं। कभी पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे थरूर अब खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं। उनके बयान, जो कभी कांग्रेस की लाइन से मेल खाते थे, अब पार्टी नेतृत्व को असहज कर रहे हैं।
हाल ही में पीएम मोदी की तारीफ और फिर राहुल गांधी पर सवाल उठाने से यह साफ हो गया कि थरूर की कांग्रेस से नाराजगी बढ़ती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, थरूर ने राहुल गांधी से अपनी भूमिका को स्पष्ट करने की मांग की थी, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस अनिश्चितता ने उनके तेवर और तल्ख कर दिए हैं।
थरूर की नाराजगी की एक बड़ी वजह यह भी है कि उन्हें पार्टी के अंदर वह अहमियत नहीं मिल रही जिसकी वह उम्मीद कर रहे थे। ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस के गठन में अहम भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें इससे बाहर कर दिया गया। इसके अलावा, संसद में उन्हें नजरअंदाज किया जाना भी उनके असंतोष को बढ़ा रहा है।
दिलचस्प यह है कि थरूर की असहमति केवल संगठनात्मक मामलों तक सीमित नहीं है। हाल ही में उन्होंने केरल में एलडीएफ सरकार के औद्योगिक विकास की सराहना की, जिससे राज्य में कांग्रेस के भीतर हलचल मच गई। इसी तरह, उन्होंने पीएम मोदी के अमेरिकी दौरे पर भी कांग्रेस के आधिकारिक रुख से अलग राय रखी, जिससे पार्टी नेतृत्व उनसे और नाराज हो गया।
कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का रुख अब साफ नजर आ रहा है—वे थरूर के लगातार बदलते रुख को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। दूसरी ओर, थरूर भी यह तय करने में लगे हैं कि क्या वह कांग्रेस के साथ अपनी सियासी पारी जारी रखेंगे या कोई नया रास्ता तलाशेंगे। उनकी बयानबाजी और पार्टी से दूरी यह इशारा कर रही है कि आने वाले दिनों में कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हो सकता है।
