बिहार में विधानसभा चुनाव वैसे तो अक्टूबर-नवंबर में होने हैं, लेकिन फरवरी से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बड़े नेताओं के लगातार दौरों से यह चर्चा जोरों पर है कि क्या बिहार में चुनाव समय से पहले हो सकते हैं?
बिहार में क्यों बढ़ रही सियासी हलचल?
1. पीएम मोदी का बिहार दौरा:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भागलपुर में किसान सम्मान निधि योजना के तहत 10 करोड़ किसानों को 22,000 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए।
कई नई योजनाओं की भी घोषणा की।
चुनाव से 8 महीने पहले पीएम मोदी का दौरा अहम माना जा रहा है।
2. बीजेपी और एनडीए के दिग्गजों की सक्रियता:
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, जीतनराम मांझी, चिराग पासवान, ललन सिंह, गिरिराज सिंह जैसे नेता लगातार बिहार का दौरा कर रहे हैं।
बिहार सरकार भी लगातार नई योजनाओं की घोषणाएं कर रही है।
3. महागठबंधन भी पीछे नहीं:
कांग्रेस और राजद के नेता भी चुनावी तैयारियों में जुटे हैं।
राहुल गांधी एक महीने में दो बार बिहार आ चुके हैं।
तेजस्वी यादव लगातार कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता अलका लांबा और कृष्णा अल्लावरू भी बिहार प्रवास पर हैं।
क्या बिहार में जल्दी हो सकते हैं चुनाव?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए सरकार को अभी फायदा मिल सकता है, इसलिए वह पहले चुनाव कराने की योजना बना सकती है।
हाल ही में महाराष्ट्र, दिल्ली और हरियाणा में एनडीए को जीत मिली है, जिससे पार्टी उत्साहित है।
बजट में बिहार को कई सौगातें मिली हैं, जिसका फायदा चुनाव में उठाया जा सकता है।
नीतीश कुमार सरकार लंबे समय से सत्ता में है, समय से पहले चुनाव होने पर सत्ता विरोधी लहर का असर कम हो सकता है।
एनडीए पहले चुनाव कराकर विपक्ष को तैयारी का पूरा मौका नहीं देना चाहता।
विपक्ष की चिंता और तैयारियां
विपक्ष को भी समय से पहले चुनाव होने की आहट मिल रही है।
कांग्रेस और राजद के नेता इस पर चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
महागठबंधन के अंदर अभी तैयारी पूरी नहीं है, जिससे एनडीए को फायदा मिल सकता है।
बिहार में जिस तरह से राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, उससे यह संभावना मजबूत हो रही है कि विधानसभा चुनाव तय समय से पहले हो सकते हैं। विपक्ष भी सतर्क हो गया है, लेकिन एनडीए पहले चुनाव कराकर सत्ता में बने रहने की कोशिश कर सकता है।
