अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए एक बार फिर “रेसिप्रोकल टैरिफ” की नीति की घोषणा की। उन्होंने कहा कि 2 अप्रैल से अमेरिका उन देशों पर उतना ही कर (टैरिफ) लगाएगा, जितना वे अमेरिका पर लगाते हैं। ट्रंप ने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के संतुलन और निष्पक्षता के लिए जरूरी कदम बताया।
चीन का कड़ा विरोध
ट्रंप के इस फैसले की चीन ने कड़ी आलोचना की। अमेरिका में स्थित चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि यदि अमेरिका किसी भी तरह के युद्ध (टैरिफ वॉर, ट्रेड वॉर आदि) की ओर बढ़ता है, तो चीन भी अंत तक लड़ने के लिए तैयार है।
अमेरिका-चीन व्यापार तनाव बढ़ा
ट्रंप प्रशासन ने चीनी उत्पादों पर पहले से लागू 10% टैरिफ बढ़ाकर 20% कर दिया, जिससे चीन भड़क गया। चीन ने इस फैसले को अनुचित बताते हुए विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अमेरिका के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। बीजिंग के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के ये कदम WTO के नियमों का उल्लंघन करते हैं और दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को नुकसान पहुंचाते हैं।
फेंटेनाइल विवाद भी गरमाया
चीन के विदेश मंत्रालय ने फेंटेनाइल संकट (अमेरिका में नशीले पदार्थों की बढ़ती समस्या) को लेकर भी बयान दिया। चीन ने आरोप लगाया कि अमेरिका अपने आंतरिक संकट के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराकर उस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। बयान में कहा गया कि चीन ने इस समस्या के समाधान के लिए अमेरिका की मदद की है, लेकिन बदले में अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाकर चीन को ब्लैकमेल करने की नीति अपनाई है।
चीन ने चेतावनी दी कि दबाव या धमकियों से उसे डराया नहीं जा सकता। अगर अमेरिका वास्तव में समाधान चाहता है, तो उसे चीन के साथ बातचीत और सहयोग का रास्ता अपनाना होगा।
