आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम और जनसेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने हाल ही में बीजेपी का समर्थन करते हुए तमिलनाडु के उन नेताओं की आलोचना की, जो हिंदी भाषा का विरोध करते हैं लेकिन अपनी फिल्मों को हिंदी में डब करवाकर आर्थिक लाभ कमाते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके और केंद्र सरकार के बीच भाषा को लेकर विवाद जारी है।
डीएमके का आरोप है कि केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति के जरिए हिंदी को जबरन थोपना चाहती है। इस मुद्दे पर 14 मार्च को अपनी पार्टी के 11वें स्थापना दिवस पर पवन कल्याण ने कहा कि भारत की एकता और सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी भाषाओं को सम्मान देना जरूरी है। उन्होंने कहा, “हमारे देश को तमिल समेत सभी भाषाओं की जरूरत है, न कि सिर्फ दो भाषाओं की।”
पवन कल्याण ने यह भी सवाल उठाया कि तमिलनाडु के कुछ नेता संस्कृत की आलोचना क्यों करते हैं और हिंदी के विरोध के बावजूद बॉलीवुड से पैसा कमाने में कोई झिझक नहीं दिखाते। उन्होंने इस रवैये को दोहरे मानदंड का उदाहरण बताया।
इसके अलावा, उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर खुली बहस की जरूरत बताई और आरोप लगाया कि कुछ नेता इसे इसलिए टालते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि इससे लोकसभा में उनके राज्यों की सीटें कम हो सकती हैं।
बीजेपी ने पवन कल्याण के बयान का समर्थन किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इस मुद्दे पर डीएमके पर निशाना साधते हुए कहा कि स्टालिन और उनके समर्थक लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं ताकि असली मुद्दों से ध्यान हटाया जा सके। उन्होंने सवाल उठाया कि डीएमके सरकार ने पिछले पांच वर्षों में तमिलनाडु के लोगों के लिए क्या किया है।
इस बयानबाजी के बीच, मशहूर अभिनेता प्रकाश राज ने भी इस विवाद में कूदकर बहस को और गर्म कर दिया है। Hu
