इस साल बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही यह स्पष्ट हो गया है कि तेजस्वी यादव कई राजनीतिक दलों के निशाने पर रहेंगे। एनडीए में शामिल भाजपा, जेडीयू, एलजेपी-आर, हम और आरएलएम के नेता लगातार उन पर हमलावर हैं। इसके अलावा जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम भी तेजस्वी के खिलाफ मुखर दिख रही हैं।
बजट सत्र के दौरान, जब नेता प्रतिपक्ष के रूप में तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला, तो नीतीश की प्रतिक्रिया तीखी रही। उन्होंने न केवल संवैधानिक मर्यादाओं को नजरअंदाज किया, बल्कि तेजस्वी को ‘बच्चा’ तक कह दिया। सदन में बहस के दौरान नीतीश ने तेजस्वी के लिए ‘तुम’ और ‘इसके-उसके’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। इस झड़प में तेजस्वी के पिता लालू यादव और मां राबड़ी देवी भी नीतीश के निशाने पर आ गए। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सदन में अभद्र इशारे करते हैं, जिसका बचाव करने के लिए जेडीयू और भाजपा के अन्य नेता भी उनके समर्थन में आ गए। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने भी तेजस्वी पर निशाना साधा।
वहीं, जन सुराज के प्रशांत किशोर अक्सर तेजस्वी की आलोचना करते हुए उन्हें ‘नौवीं फेल’ कहकर उनका मजाक उड़ाते हैं। उनके अनुसार, तेजस्वी की राजनीति सिर्फ लालू यादव की विरासत पर टिकी है। प्रशांत किशोर, नीतीश कुमार की तरह ही तेजस्वी को भी बिहार की राजनीति के लिए नुकसानदेह मानते हैं। इसी कारण आरजेडी ने जन सुराज को भाजपा की ‘बी’ टीम करार दिया था और अपने कार्यकर्ताओं को प्रशांत किशोर से सावधान रहने की हिदायत भी दी थी।
