भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 286 दिनों के लंबे अंतरिक्ष मिशन के बाद सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आई हैं। उनकी इस सुरक्षित वापसी से उनके पैतृक गांव झूलासन, गुजरात में हर्षोल्लास का माहौल है। ग्रामीणों ने विशेष प्रार्थनाएं कीं और डोला माता मंदिर में अखंड ज्योति जलाई थी।
सुनीता विलियम्स और उनके साथी अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर ने 5 जून 2024 को बोइंग के स्टारलाइनर कैप्सूल से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए प्रस्थान किया था। यह मिशन केवल आठ दिनों का होना था, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण यह 286 दिनों तक बढ़ गया।
पृथ्वी पर लौटते समय, अंतरिक्ष यान को वायुमंडल में पुनः प्रवेश के दौरान 7 मिनट के ब्लैकआउट और 1900 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद, स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल फ्लोरिडा के तट पर सफलतापूर्वक उतरा।
सुनीता विलियम्स की इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पत्र लिखकर भारत आने का निमंत्रण दिया है। उन्होंने लिखा, “भले ही आप हजारों मील दूर हों, लेकिन आप हमारे दिलों के करीब हैं। भारत के लोग आपके अच्छे स्वास्थ्य और आपके मिशन में सफलता के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।”
इस मिशन के दौरान, सुनीता विलियम्स के शरीर में कई परिवर्तन हुए हैं, जैसे हर सेकेंड 30 लाख लाल रक्त कोशिकाओं का नष्ट होना, जिसे “स्पेस एनीमिया” कहा जाता है, और “बेबी फीट” जैसी समस्याएं। इनसे उबरने के लिए उन्हें पृथ्वी पर विशेष पुनर्वास की आवश्यकता होगी।
उनकी सुरक्षित वापसी से न केवल उनके परिवार और गांव में, बल्कि पूरे भारत में खुशी की लहर है। यह मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है।
