वक्फ संशोधन विधेयक के पास होने के बाद भारतीय राजनीति में एक नया ट्रेंड देखने को मिला है। अब कुछ ऐसी पार्टियाँ सामने आई हैं जिन्हें ‘नई सेक्युलर’ कहा जा सकता है। ये पार्टियाँ अब मुस्लिम वोट बैंक की नाराज़गी की परवाह किए बिना खुलकर बीजेपी के साथ खड़ी हो रही हैं।
जैसे जेडीयू, तेलगूदेशम, जेडीएस, एनसीपी, लोजपा (रामविलास), राष्ट्रीय लोकदल और असम गण परिषद – इन सभी ने वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया। इनका कहना है कि मोदी सरकार इस कानून के जरिए वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा करना चाहती है। यहाँ तक कि एनडीए का हिस्सा न होने वाली बीजू जनता दल ने भी राज्यसभा में इस बिल का समर्थन करके इस ‘नई सेक्युलर’ टीम को और मज़बूती दी।
अब तक जो पार्टियाँ मुस्लिम समुदाय के वोटों के सहारे अपनी राजनीति करती थीं, उन्होंने न सिर्फ इस मुद्दे पर बीजेपी का साथ दिया, बल्कि सेक्युलरिज्म की परिभाषा को भी नए सिरे से गढ़ा। उनके लिए अब बीजेपी सांप्रदायिक पार्टी नहीं रही। माना जा रहा है कि भारतीय राजनीति में आया यह बदलाव लंबे समय तक असर दिखाएगा।
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