समाज कल्याण मंत्री ने ₹5 लाख के छात्रावास घोटाले में दो अफसरों को निलंबित किया, जांच सौंपी डिप्टी डायरेक्टर को

बाराबंकी के रामनगर पीजी कॉलेज के छात्रावास में हुए ₹5 लाख के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने रविवार को छात्रावास का निरीक्षण किया, जिसके दौरान रंग-रोगन कार्य में बड़ी अनियमितता सामने आई। जांच में पता चला कि ₹5 लाख की सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है। इस गंभीर मामले को देखते हुए मंत्री ने समाज कल्याण विभाग के दो महत्वपूर्ण अधिकारियों — समाज कल्याण अधिकारी और छात्रावास अधीक्षक — को तुरंत निलंबित कर दिया।

मंत्री ने कहा कि इस प्रकार की धोखाधड़ी और गड़बड़ी सरकार के पैसों के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़ा संदेश है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उन लोगों से सरकार का पैसा वापस भी लिया जाएगा। इस घोटाले की गहन जांच के लिए डिप्टी डायरेक्टर, अयोध्या को जिम्मेदारी सौंपी गई है। डिप्टी डायरेक्टर जांच कर सभी कड़ियों को खोलेंगे और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

मंत्री असीम अरुण ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि छात्रावास जैसी संस्थाओं में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखा जाए ताकि छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में शून्य सहनशीलता नीति अपनाई जाएगी ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग न हो। मंत्री का यह कदम अन्य विभागों को भी सतर्क करने वाला साबित होगा, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके।

समाज कल्याण मंत्री की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार सरकारी धन की हिफाजत और पारदर्शिता पर पूरी तरह से ध्यान दे रही है। इस मामले में दोषी पाए गए कर्मचारियों से न केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, बल्कि उनसे संबंधित राशि की वसूली भी की जाएगी। इस जांच के बाद आवश्यक कदम उठाकर भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने के लिए प्रभावी नीतियां बनाई जाएंगी।

इस घटना ने छात्रावास व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है। सरकार की तरफ से नियमित निरीक्षण और जांच प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा ताकि छात्रों को शैक्षणिक संस्थानों में बेहतर सुविधाएं मिलती रहें और सरकारी धन का सही उपयोग हो सके।

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