भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में एक साक्षात्कार में यूरोपीय देशों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जहां यूरोप यूक्रेन युद्ध पर केंद्रित है, वहीं भारत के लिए चीन और पाकिस्तान से जुड़ी सुरक्षा चिंताएं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
1. यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख: जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन युद्ध का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से संभव है। उन्होंने सभी पक्षों से संवाद के माध्यम से समाधान खोजने का आग्रह किया।
2. रूस से तेल खरीद पर प्रतिक्रिया: जब यूरोपीय देशों ने भारत की रूस से तेल खरीद पर सवाल उठाया, तो जयशंकर ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि सिद्धांतों की इतनी परवाह है, तो यूरोप को खुद रूस के साथ अपने व्यापारिक संबंध समाप्त कर देने चाहिए। उन्होंने पूछा, “क्या हम तेल के लिए ज्यादा दाम सिर्फ इसलिए चुकाएं जिससे यूरोप खुश हो जाए?”
3. चीन और पाकिस्तान पर ध्यान: जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकताएं यूरोप से भिन्न हैं। उन्होंने कहा कि जहां यूरोप यूक्रेन पर केंद्रित है, वहीं भारत के लिए चीन और पाकिस्तान से संबंधित सुरक्षा चिंताएं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
4. भारत की वैश्विक भूमिका: जयशंकर ने बताया कि भारत उन कुछ देशों में से एक है जो रूस, यूक्रेन, इजराइल और ईरान जैसे परस्पर विरोधी देशों से संवाद करने की स्थिति में है। यह भारत की संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति का प्रमाण है।
5. पश्चिमी देशों की दोहरी नीति पर आलोचना: उन्होंने पश्चिमी देशों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एशिया में चीन की आक्रामकता या अफगानिस्तान में संकट होता है, तो यूरोप और अमेरिका चुप रहते हैं, लेकिन यूक्रेन के मुद्दे पर दुनिया से समर्थन की अपेक्षा करते हैं।
