ऑपरेशन सिंदूर” और वैश्विक मंचों पर भारत की कूटनीति से बौखलाया पाकिस्तान, शांति की बात कर बचाव में उतरा

भारत के बहुप्रचारित ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की रणनीति ने पड़ोसी देश की बेचैनी को उजागर कर दिया है। भारत की ओर से हाल ही में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पाकिस्तान को आतंकवाद समर्थक राष्ट्र के रूप में चित्रित करने और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सटीक कूटनीतिक अभियान चलाने के बाद अब पाकिस्तान शांति की बातें करने लगा है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान जारी कर भारत के उन बयानों को “तथ्यहीन और भ्रामक” बताया है जिनमें पाकिस्तान को क्षेत्रीय अस्थिरता का स्रोत कहा गया था। पाकिस्तान ने दावा किया कि वह शांति, स्थिरता और रचनात्मक साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, उसने यह भी जोड़ा कि अगर उस पर कोई आक्रामकता हुई, तो वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।

 मोदी सरकार के हमलों से पाक में घबराहट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, और विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा पाकिस्तान पर किए गए तीखे हमलों से भी पाकिस्तान चिंतित है। इन नेताओं ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को संरक्षण देने का आरोप लगाया है, खासकर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद, जिसमें 26 लोग मारे गए थे।

इस हमले के बाद भारत ने 6-7 मई की रात को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक और लक्षित सैन्य हमले किए। भारत के इस तगड़े जवाब के बाद पाकिस्तान का आक्रामक रुख कमजोर पड़ा और वह शांति वार्ता की दुहाई देने लगा।

 पाक ने फिर छेड़ा कश्मीर का राग

अपने बयान में पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को उछालते हुए कहा कि यह दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता में सबसे बड़ी बाधा है। भारत ने इस पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं, और पाकिस्तान को आतंकवाद पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि कश्मीर पर।

 पाकिस्तानी DGMO ने मांगी युद्धविराम की गुहार

ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तान ने भी 8 से 10 मई के बीच भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया। इसके बाद पाकिस्तानी सेना के महानिदेशक (DGMO) ने भारतीय समकक्ष को फोन कर युद्धविराम की अपील की। यह वही पाकिस्तान है जो पहले आए दिन परमाणु हमले की धमकियां देता था, लेकिन अब वह खुद को शांति का समर्थक बताने लगा है।

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