गौतम बुद्ध नगर 20 जून, 2025
खरीफ की फसलों में बेहतर उपज और रोगों से सुरक्षा के लिए बीज शोधन को अनिवार्य बताया गया है। उत्तर प्रदेश के कृषि जिला अधिकारी राजीव कुमार ने किसानों को सलाह देते हुए बताया कि फसलें जैसे धान, मक्का, गन्ना, ज्वार, बाजरा जैसे फसलो को बुवाई से पहले जरूर जांचे l इससे बीज जनित रोग फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैंl उन्होंने बताया कि बीज शोधन के लिए किसान थीरम 75 प्रतिशत डब्लू.पी. की 2.5 ग्राम मात्रा या कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत की 2 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज या ट्राइकोडरमा की 4 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज में से किसी एक का उपयोग करें। इसके अलावा धान में जीवाणु जनित रोगों की रोकथाम के लिए स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत एवं टेट्रासाइक्लिन 10 प्रतिशत की मिश्रित 4 ग्राम मात्रा से प्रति किलोग्राम बीज का उपचार किया जा सकता है। राजीव कुमार ने बातया की बीज शोधन से न केवल फसल को रोगों से बचाया जा सकता है, बल्कि इसके कई लाभ भी हैं। इससे जमाव अच्छा होता है, मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है l यह पौधों को जैविक नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है, और मिट्टी की उर्वरता तथा उत्पादकता बढ़ाने में काफ़ी मदद करता है। इसके अलावा, मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीवों को संरक्षित रखने तथा फसल की सुरक्षा के लिए यह ये बेहतरीन उपयोगी साबित होंगी l बीज शोधन करते समय कुछ सावधानियों का पालन करना भी जरूरी है। रासायनिक विधियों में केवल निर्धारित मात्रा में ही रसायनों का प्रयोग करें। रासायनिक व जैविक विधियों में से किसी एक का चयन करें । उन्होंने बातया की यदि जैविक विधि जैसे बायोपेस्टीसाइड का प्रयोग करें तो उसकी निर्माण व समाप्ति तिथि को जाँच ले, धूप या गर्मी से बीजों को बचाएं। दीमक या चींटी से बीजों को बचाने के लिए क्लोरपाइरीफॉस की 3 मिली प्रति किलो बीज उपयोग की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि एक से अधिक विधियों का प्रयोग करना हो, तो पहले फफूंदनाशी, फिर कीटनाशी और अंत में जैविक उपचार करें
