मुख्य बिंदु:
अलकनंदा नदी उफान पर: रुद्रप्रयाग में लगातार भारी बारिश के बाद अलकनंदा नदी का जलस्तर 20 मीटर से अधिक बढ़ गया, जिससे घाट, पैदल मार्ग और मंदिर परिसर प्रभावित हुए
15‑फीट शिव मूर्ति डूबी: बेनी ब्रिज के पास स्थित 15‑फीट ऊँची शिव मूर्ति पूरी तरह जलमग्न हो गई, जो हालात की गंभीरता दर्शाती है
खतरे की चेतावनी: प्रशासन ने नदी के करीब जाने से सख़्त मना किया है; मंदाकिनी और अन्य सहायक नदियाँ भी उतनी ही खतरे में चल रही हैं
हिमाचल में भी उत्पात: मंडी जिले में क्लाउडबर्स्ट से 1 की मौत, 9 लापता; IMD ने हिमाचल में रेड अलर्ट जारी किया
जून में भारी तबाही: जून 2025 में उत्तराखंड में मानसून ने जोर पकड़ा—65 से अधिक मौतें (2024 की तुलना में दोगुनी), 18 लोग अभी भी लापता; प्रमुख घटनाओं में चारधाम बस दुर्घटना भी शामिल है
असर और सलाह:
पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन, बांध टूटने और फ्लैश फ्लड की आशंका बनी हुई है।
मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें—खासकर नदी किनारे, घाटों और संवेदनशील इलाकों से दूरी बनाए रखें।
राज्य आपदा प्रबंधन टीम, SDRF और NDRF सक्रियता से मोर्चे पर हैं, लेकिन सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
राहत और आगे की कार्रवाई:
स्थानीय प्रशासन ने बचाव कार्य तेज कर दिए हैं और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
IMD का रेड और येलो अलर्ट जारी—मंगलवार-गुरुवार तक तेज बारिश की संभावना बनी है।
यह मॉनसून उत्तराखंड और हिमाचल के लिए अब तक सबसे उग्र साबित हो रहा है—नदियाँ उफान पर, यातायात और यात्री तीर्थयात्रा प्रभावित, और भारी नुकसान की आशंका। ऐसे में तत्काल बचाव, सतर्कता और योजनाबद्ध आपदा प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
