नई दिल्ली। बिहार में घर-घर जाकर हो रहे वोटर वेरिफिकेशन अभियान को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। कोर्ट इस मामले में अब गुरुवार को याचिकाकर्ताओं और संबंधित पक्षों की दलीलें सुनेगा।
इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार सरकार द्वारा मतदाता सूची के सत्यापन के लिए चलाए जा रहे अभियान में पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रक्रिया के खिलाफ है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे आम मतदाता पर दबाव पड़ सकता है और यह चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीर और लोकतंत्र से जुड़ा हुआ माना है और कहा कि यह मामला सुनवाई योग्य है। इसके तहत अदालत तय करेगी कि क्या वोटर वेरिफिकेशन की मौजूदा प्रक्रिया भारतीय संविधान और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है या नहीं।
गौरतलब है कि बिहार में 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में वोटर लिस्ट का निष्पक्ष और पारदर्शी होना बेहद जरूरी माना जा रहा है। अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जा रहा है।
