भारत की तेजी से बढ़ती ताकत और रणनीतिक साझेदारियों को देखकर चीन की चिंता बढ़ गई है। पड़ोसी देशों से विवादों में उलझा चीन अब भारत की कूटनीतिक चालों से खुद को घिरा महसूस कर रहा है। सैन्य, आर्थिक और वैश्विक मंचों पर भारत की मजबूत होती स्थिति से ड्रैगन की बेचैनी साफ नजर आने लगी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब उन देशों के साथ रिश्ते मजबूत कर रहा है, जो चीन से सीधे टकराव की स्थिति में हैं – जैसे जापान, ताइवान, वियतनाम और ऑस्ट्रेलिया। इन देशों से भारत की बढ़ती नजदीकी को ‘पड़ोसी बदलने’ की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत की सक्रिय भूमिका QUAD जैसे समूहों में भी चीन के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा, दुनिया की कई बड़ी कंपनियां अब चीन की जगह भारत में निवेश को प्राथमिकता दे रही हैं। इससे चीन की अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है।
चीन की आंतरिक स्थिति भी अच्छी नहीं है। वहां बेरोजगारी बढ़ रही है, अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ी है और जनता में असंतोष देखा जा रहा है। ऐसे में भारत का वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रभाव चीन के लिए तनाव का कारण बन गया है।
रणनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में भारत अपनी मजबूत कूटनीति और रिश्तों से चीन को पूरी तरह घेर सकता है। यही वजह है कि ड्रैगन तड़प-तड़प कर देख रहा है, लेकिन सीधे प्रतिक्रिया देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
