25 जुलाई 2025 की रात बलिया जिले के सोनवरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में बिजली कटने और जनरेटर की खराबी के चलते एक 96 वर्षीय बुजुर्ग महिला मरीज, मुन्नी देवी, की मृत्यु हो गई। उन्हें सांस की तकलीफ पर उपचार हेतु CHC लाया गया था, लेकिन सेवनिक बिजली न होने के कारण अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट चालू नहीं हो सका। जनरेटर भी खराब हो चुका था, जिससे ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई। परिणाम स्वरूप महिला ने दम तोड़ दिया ।
घटना के समय बिजली निकाली गई थी और इन्वर्टर भी जवाब दे चुका था। सीएचसी प्रभारी डॉक्टर राजेश ने बताया कि मुन्नी देवी को दोपहर से ही सांस लेने में दिक्कत थी। उन्हें जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया और एम्बुलेंस भी बुला ली गई थी, लेकिन परिजन उन्हें CHC में ही इलाज करवाने पर अड़े रहे। इस बीच उनकी स्थिति बिगड़ती चली गई और इलाज के दौरान उन्होंने मौत हो गई ।
यह मामला अस्पतालों में बुनियादी कोरोना सुविधाओं की कमी और बिजली व्यवस्था की अत्यंत कमजोरी को उजागर करता है। ऑक्सीजन प्लांट और जनरेटर — दोनों मौखिक प्रणालियों में दोष स्पष्ट है। सोनवरसा CHC जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में बुनियादी जीवनरक्षक सेवाओं की स्थायित्व सुनिश्चित करना आवश्यक है।
इस घटना ने प्रशासन की तत्परता और निगरानी की कमी पर सवाल खड़ा कर दिया है। मरीजों की समय पर बेहतर देखभाल और उपकरणों की कार्यशीलता सुनिश्चित करने में चूक स्पष्ट है।
पिछले वर्षों में बलिया में अस्पतालों में बिजली कटौती और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण हुई असामयिक मौतों की प्रवृत्ति कई बार सामने आई है। जून 2023 में इसी जिले के जिला अस्पतालों में 76 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें बिजली कटौती और बिजली की खराब आपूर्ति को एक मुख्य कारण बताया गया था। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा था कि कई ट्रांसफार्मर फेल हो गए थे और मरीजों की हालत बिजली बाधित होने से और बिगड़ गई थी ।
इस तरह की दुर्घटनाएं अस्पतालों की बुनियादी संरचनात्मक और तंत्रगत सुगमता की गंभीर कमी को उजागर करती हैं। बिजली बाधित होने से गंभीर मामलों जैसे ऑक्सीजन सपोर्ट कोरोसे कोई सुविधा उपलब्ध न हो पाना अत्यंत चिंतनीय है। सरकार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रिकवरी-समर्थ बिजली प्रणाली, कार्यक्षम जनरेटर, नियमित रख‑रखाव और तत्काल सक्रियता सुनिश्चित करनी चाहिए।
मुख्य सरकारी अधिकारी अब इस घटना की तत्काल जांच की मांग कर सकते हैं, दोषियों के विरुद्ध देखने, अस्पताल व्यवस्था की समीक्षा और सुधारात्मक कार्रवाई की पेशकश की उम्मीद जग रही है। साथ ही इस प्रकार की दुर्भाग्यपूर्ण चींटियों से निवारण हेतु जागरूकता बढ़ाने और बेहतर निगरानी व्यवस्था स्थापित करने की जरूरत है।
