नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर होने वाली चर्चा से पहले मौन व्रत लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह इस मुद्दे पर पार्टी की आलोचनात्मक लाइन से अलग अपनी राय नहीं रख सकते, जिसके कारण उन्हें मौन रहने का फैसला लेना पड़ा है। थरूर का यह कदम पार्टी और उनके बीच बढ़ते मतभेदों को उजागर करता है।
लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान शशि थरूर को ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा करने वाले प्रमुख सांसदों की सूची में शामिल नहीं किया गया। इस पर जब उनसे सवाल किया गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मौनव्रत, मौनव्रत”। यह जवाब इस ओर इशारा करता है कि वह पार्टी की आलोचना करने के बजाय चुप रहना पसंद कर रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी ने शशि थरूर की राय को समय-समय पर आलोचना की है, विशेष रूप से जब उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का समर्थन किया था। इससे पार्टी नेतृत्व और थरूर के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, थरूर को अब पार्टी के दृष्टिकोण से मेल नहीं खाती उनकी राय के कारण महत्वपूर्ण मंचों से हटा दिया गया है।
कांग्रेस की ओर से यह संकेत दिया गया है कि थरूर को पार्टी लाइन से बाहर जाकर अपनी राय रखने का कोई हक नहीं है। ऐसे में उनका मौन रहना और चर्चा से दूर रहना इस बात का संकेत है कि उनका कांग्रेस से संबंध अब कमजोर हो सकता है।
