सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया है कि आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में रखा जाए। इस फैसले पर दो तरह की राय सामने आई है, कुछ लोग इसके पक्ष में हैं, तो कुछ पशु प्रेमी इसका विरोध कर रहे हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि यह कुत्तों के प्रति अन्याय है, जबकि समर्थकों का मानना है कि इससे लोगों की सुरक्षा बढ़ेगी। चुनौती यह है कि इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाना, उनके खाने-पीने और बीमार होने पर इलाज के लिए स्टाफ की व्यवस्था करना काफी खर्चीला और कठिन है। यह खर्च और प्रबंधन दिल्ली-एनसीआर के स्थानीय प्रशासन को करना होगा, जिसके लिए अतिरिक्त बजट और संसाधन चाहिए। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा में,गाय और बैल भी सड़कों पर आवारा घूमते हैं। ये न केवल राहगीरों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि दुर्घटनाओं में खुद भी घायल हो जाते हैं। शहर को बसे तीन दशक से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अब तक यहां कोई पशु चिकित्सालय नहीं है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में पशुओं का सही इलाज हो सके। नागरिकों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से इन समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की है।
ग्रेटर नोएडा में आवारा पशुओं की समस्या, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उठे सवाल
