ग्रेटर नोएडा में गंदगी का अंबार, बीमारियों का खतरा बढ़ा – जिम्मेदारी किसकी?

स्वच्छता किसी भी शहर की पहचान होती है, लेकिन ग्रेटर नोएडा के कुछ इलाकों में हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। नॉलेज पार्क-1 में कचरे के ढेर और गंदगी ने न केवल शहर की सुंदरता को बिगाड़ा है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-1 क्षेत्र में सड़क किनारे और खुले स्थानों पर भारी मात्रा में कचरा जमा हो गया है। इस कचरे में प्लास्टिक की थैलियां, खाने के पैकेट, डिस्पोजेबल कप-प्लेट और गीला कचरा शामिल है। बरसात के मौसम में इस गंदगी से तेज़ बदबू फैल रही है, जिससे स्थानीय लोगों और राहगीरों का वहां से गुजरना मुश्किल हो गया है। सबसे बड़ी चिंता मच्छर और मक्खियों के बढ़ते प्रकोप की है। लोग चेतावनी दे रहे हैं कि इस स्थिति में डेंगू, मलेरिया और डायरिया जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। इलाके के लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार सफाई व्यवस्था सुधारने की मांग की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के स्वास्थ्य विभाग ने सफाई व्यवस्था के लिए ठेकेदारों को करोड़ों रुपये के टेंडर दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नज़र नहीं आ रहा। सफाईकर्मी समय पर नहीं आते और कचरे का सही निस्तारण नहीं किया जाता। इससे नालियों के चोक होने और बरसात में पानी भराव की समस्या और बढ़ने का खतरा है। सामाजिक संगठनों और युवाओं ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द सफाई नहीं करवाई, तो लोगों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ जाएगा और शहर की छवि और खराब होगी।

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