ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण क्षेत्र के कई गाँवों के किसान लंबे समय से अपनी 4% आबादी भूखंड की माँग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर आज किसानों ने सांसद डॉ. महेश शर्मा को ज्ञापन सौंपा। किसानों का कहना है कि उन्होंने वर्ष 1997 की करार नीति के अनुसार अपनी जमीन विकास कार्यों के लिए प्राधिकरण को दी थी और उसका मुआवजा भी ले लिया था। लेकिन समझौते के बाद भी उन्हें पूरा लाभ नहीं दिया गया।
किसानों ने बताया कि जब कुछ किसानों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया तो उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट की फुल बेंच के फैसले (21 अक्टूबर 2011) के अनुसार 64.70% मुआवजा और 10% विकसित आबादी भूखंड मिल गया। वहीं, जो किसान कोर्ट नहीं गए और प्राधिकरण पर भरोसा करते हुए विकास कार्यों में सहयोग देते रहे, उन्हें आज तक शेष 4% भूखंड नहीं दिया गया।
किसानों का कहना है कि तत्कालीन चेयरमैन रमा रमन ने गाँव के सम्मानित लोगों के साथ यह लिखित समझौता किया था कि कोर्ट न जाने वाले किसानों को भी समान लाभ मिलेगा। लेकिन आज तक इस समझौते का पालन नहीं हुआ। किसानों ने इसे सीधा धोखा बताया और कहा कि यह अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान किसानों ने कहा कि जो लोग कोर्ट गए, उन्हें सब मिल गया, और जो लोग समझौते पर भरोसा कर चुप रहे, उन्हें नुकसान झेलना पड़ा। यह अन्याय अब और सहन नहीं होगा।
सांसद डॉ. महेश शर्मा ने किसानों को भरोसा दिलाया कि वे इस विषय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गृहमंत्री अमित शाह और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के CEO को पत्र लिखेंगे और शीघ्र समाधान की कोशिश करेंगे।
किसानों ने सांसद के इस रुख का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि अब उन्हें लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिलेगा और उनका हक वापस मिलेगा।
