ग्रेटर नोएडा से अब किसानो को बासमती धान की खेती में 11 तरह की कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि ट्राइसाईक्लाजोल, बुप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरोपाईरीफॉस, प्रोपिकोनाजोल, टेबुकोनाजोल, थायोमेथाक्साम, प्रोफेनोफॉस, इमीडाक्लोप्रिड, कार्बेन्डाजिम और कार्बोफ्यूरान जैसे रसायन अब बासमती धान पर नहीं डाले जा सकते। यह फैसला इसिलिए लिया गया क्योंकि इन दवाओं के इस्तेमाल करने से बासमती चावल में जहरीले अवशेष रह जाते हैं। इसकी वजह से बासमती चावल का विदेशों में निर्यात रुक जाता है, और राष्ट्रयि एंव अंतरराष्ट्रयि दोनो को नुकसान का सामना करना पड़ता है। कृषि विभाग ने सभी दवा विक्रेताओं को आदेश दिया है कि वे अपने पास मौजूद इन रसायनों का ब्योरा एक हफ्ते में कार्यालय को दें। इसके अलावा बाजारों और दुकानों पर भी इस प्रकार के दवाओं पर रोक लगा दिया गया है। जिससे फसलों को हानि ना पहंचे और किसान भी लाभ उठा सके। साथ ही, 30 सितंबर 2025 तक इन दवाओं की बिक्री भी बंद रहेगी। अगर किसी ने नियम तोड़ा तो उसके खिलाफ कीटनाशी अधिनियम–1968 के तहत सख्त कार्रवाई भी जाएगी।
बासमती धान पर 11 कीटनाशक दवाओं के इस्तेमाल पर रोक, नियम तोड़ने पर अधिनियम–1968 के तहत सख्त कार्रवा
