गामा-1 की गंदगी पर विवाद, निवासियों की नाराज़गी

गामा-1 क्षेत्र में जगह-जगह गंदगी और मलबे के ढेर लगे हुए हैं। तस्वीरों में भी साफ देखा जा सकता है कि सड़क किनारे मिट्टी, ईंट-पत्थर और कूड़ा इकठ्ठा पड़ा है। यह न केवल देखने में खराब लग रहा है बल्कि लोगों के लिए परेशानी भी बढ़ा रहा है।

क्षेत्र की निवासी निर्मला, बिष्ट और गीता ने बताया कि जब उन्होंने सफाई कर्मचारी से कूड़ा उठाने की बात की, तो उसने साफ कह दिया कि “पहले शिकायत करो, तभी कूड़ा उठाया जाएगा।” इस तरह का जवाब सुनकर स्थानीय लोग बेहद नाराज़ हैं। उनका कहना है कि सफाई कर्मचारियों का काम ही क्षेत्र को साफ रखना है, फिर शिकायत के बिना क्यों काम नहीं किया जाता?

वहीं, स्थानीय निवासी चंद्रकांत ने कहा कि प्राधिकरण अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। गामा-1 जैसे बड़े सेक्टर में अगर लोग हर छोटी-बड़ी समस्या की शिकायत करने बैठ जाएं, तो यह प्रशासन की नाकामी को दिखाता है। सफाई व्यवस्था खुद-ब-खुद चलनी चाहिए। लोगों को शिकायत करने पर मजबूर करना सही नहीं है।

निवासियों का कहना है कि इस गंदगी से बच्चों को खेलने में दिक्कत होती है, मच्छरों का खतरा बढ़ता है और बीमारियां फैलने की आशंका रहती है। साथ ही, बाहर से आने वाले लोगों पर भी बुरा असर पड़ता है। जगह-जगह पड़े मलबे और कूड़े के कारण सेक्टर की सुंदरता बिगड़ रही है।

लोगों ने यह भी कहा कि जब समय-समय पर घरों से टैक्स लिया जाता है और रखरखाव के नाम पर शुल्क वसूला जाता है, तो बदले में सुविधाएं क्यों नहीं मिलतीं? सफाई जैसी बुनियादी जिम्मेदारी में लापरवाही करना बिल्कुल भी उचित नहीं है।

निवासियों की मांग है कि प्राधिकरण तुरंत कार्रवाई करे, मलबा और कूड़ा हटवाए और सफाई कर्मचारियों को सख्त निर्देश दे कि वे नियमित सफाई करें। शिकायत का इंतजार करने के बजाय, प्राधिकरण को खुद निरीक्षण करना चाहिए।

गामा-1 की यह स्थिति यह दिखाती है कि अगर सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो लोगों का विश्वास प्रशासन पर से उठ जाएगा। निवासियों का कहना है कि वे जल्द ही सामूहिक रूप से शिकायत दर्ज करेंगे और अगर जरूरत पड़ी तो मीडिया और उच्च अधिकारियों तक मामला पहुंचाएंगे।

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