जुनपत गांव का उच्च प्राथमिक विद्यालय इन दिनों उपेक्षा और लापरवाही का शिकार बना हुआ है। यह विद्यालय बच्चों की पढ़ाई का प्रमुख केंद्र है, लेकिन यहां की स्थिति देखकर साफ है कि जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सबसे बड़ी समस्या स्कूल की साफ-सफाई की है। विद्यालय में झाड़ू लगाने या गंदगी हटाने की कोई पक्की व्यवस्था नहीं है। सफाई कर्मचारी हफ्ते या दस दिन में सिर्फ एक बार आते हैं और केवल जमा हुआ कचरा उठाकर चले जाते हैं। नतीजा यह है कि कक्षाओं और परिसर में गंदगी बनी रहती है।
पानी की सुविधा भी खराब है। विद्यालय में बच्चों के लिए पानी की टंकी लगाई गई थी, लेकिन गांव के कुछ शरारती बच्चों ने उसे तोड़ दिया। उसके बाद उसकी मरम्मत कभी नहीं हुई और अब उस पर ताला लगा है। इस कारण बच्चों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा और उन्हें हैंडपंप या घर से पानी लाना पड़ता है।
बरसात के दिनों में स्थिति और भी बिगड़ जाती है। विद्यालय में गंदगी और कीचड़ जमा हो जाता है। कुछ अध्यापिकाओं का कहना है कि अगर नियमित सफाई कराई जाए तो बच्चे आसानी से प्रार्थना सभा (प्रेयर) कर सकेंगे और बरसात में उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सुरक्षा भी एक बड़ी समस्या है। विद्यालय परिसर में आए दिन सांप दिखाई देते हैं, जिससे बच्चों और शिक्षकों दोनों में डर बना रहता है। इसके बावजूद अभी तक अधिकारियों की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है।
निर्माण कार्य भी अधूरा पड़ा है। बच्चों के बैठने के लिए दो बार सीमेंट की सीटें लगाई गईं, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें तोड़ दिया गया। अब तक उनकी मरम्मत नहीं हुई है।
ग्रामीणों और अध्यापिकाओं का कहना है कि सरकारी विद्यालय होने के बावजूद यहां सुविधाओं का अभाव बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय की सफाई, पानी की व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर तत्काल कदम उठाए जाएं।
