ग्रेटर नोएडा शहर अपनी आधुनिक पहचान और तेज़ी से हो रहे विकास के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके साथ ही यहां की सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी लोगों के लिए बड़ी परेशानी और खतरे का कारण बन रही है। दिन के समय तो ये पशु मैदानों और खाली जगहों पर दिखाई देते हैं, लेकिन शाम ढलते ही ये सड़क पर आ जाते हैं और यातायात को प्रभावित करने लगते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर प्रशासन ने कई बार दावा किया कि इन आवारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा जा रहा है। मगर हकीकत तस्वीरों और ज़मीनी हालात से साफ झलकती है। खाली प्लॉटों और अधूरे निर्माणाधीन भवनों के आसपास ये गाय और बछड़े दिनभर घूमते दिखाई देते हैं। वहीं, शाम को ये झुंड बनाकर सड़कों पर निकल आते हैं, जिससे वाहन चालकों को परेशानी होती है। कई बार दुर्घटनाओं का भी खतरा बना रहता है।
कुछ ही दिन पहले बेटा-एक क्षेत्र में एक शख्स पर इन मवेशियों ने हमला कर दिया था। घायल व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। इस घटना के बाद उम्मीद की जा रही थी कि प्रशासन सख्ती दिखाएगा और लापरवाही पर लगाम लगाएगा, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
लोगों का कहना है कि नगर निगम केवल दिखावे की कार्यवाही करता है। कभी-कभी कुछ मवेशियों को पकड़कर ले जाया जाता है, लेकिन अगले ही दिन वे फिर सड़कों पर दिखाई देने लगते हैं। वहीं, इन आवारा पशुओं की वजह से बच्चों और बुजुर्गों के लिए पार्कों और गलियों में निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
ग्रेटर नोएडा जैसे शहर में जहां स्मार्ट सिटी और आधुनिक सुविधाओं के सपने दिखाए जाते हैं, वहां की सड़कों पर मवेशियों का खुलेआम घूमना प्रशासन की नाकामी को उजागर करता है। अब ज़रूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी गंभीरता से इस समस्या का समाधान करें। वरना आवारा मवेशियों की यह लापरवाही किसी बड़ी घटना का कारण बन सकती है।
