ऐच्छर में परम पूज्य गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन और अध्यक्ष आनंद भाटी के मार्गदर्शन में भगवान श्रीराम की महा लीला का तीसरा दिन संपन्न हुआ। अध्यक्ष आनंद भाटी ने बताया कि मंचन की शुरुआत देवासुर संग्राम से हुई। रावण के अत्याचार से पीड़ित जनमानस का दृश्य हृदय विदीर्ण कर देने वाला रहा। पृथ्वी, मनुष्य, देवता और ऋषि-मुनि सभी प्रभु विष्णु से याचना करते हैं। इन दुखों को देखकर प्रभु का हृदय पिघल जाता है और वे धरती पर अवतरित होने का वचन देते हैं।
अयोध्या में महाराज दशरथ पुत्रेष्टि यज्ञ के लिए ऋषि श्रींगी से मिलते हैं। यज्ञफल से महाराज दशरथ को प्रभु श्रीराम और चारों पुत्र प्राप्त होते हैं। पूरे अयोध्या में खुशियों की लहर फैल जाती है और शहर को दिव्य रूप से सजाया गया। देवी-देवता भी भगवान के दर्शन के लिए विभिन्न रूपों में उपस्थित हुए।
दूसरी ओर जनकपुर में महाराज जनक अपनी प्रजा की कठिनाइयों से पीड़ित थे। ऋषियों के सुझाव पर उन्होंने महारानी के साथ खेतों में हल चलाया। इसी दौरान माता सीता भूमि से प्रकट हुईं और जनक को पुत्री रूप में माता लक्ष्मी प्राप्त हुईं। यह दृश्य जनकपुर में वैभव और संपन्नता का प्रतीक बन गया।
लीला से हमें यह शिक्षा मिलती है कि ब्रह्मांड में ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान न हो। विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और परमपिता प्रभु पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। जैसे रावण की समस्या के समाधान में प्रभु श्रीराम और दरिद्रता में माता लक्ष्मी प्रकट हुईं।
इस अवसर पर मुख्य संस्थापक गोस्वामी सुशील जी महाराज, संस्थापक एडवोकेट राजकुमार नागर, पंडित प्रदीप शर्मा, शेर सिंह भाटी, हरवीर मावी, नरेश गुप्ता, सुशील नागर, धीरेंद्र भाटी, मनोज गुप्ता, सतीश भाटी, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, बालकिशन सफीपुर, धीरज शर्मा, महासचिव ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश शर्मा बदौली, सुभाष भाटी, उमेश गौतम, योगेंद्र भाटी, मनीष डाबर, रोशनी सिंह, चैन पाल प्रधान, मीडिया प्रभारी अतुल आनंद, उपाध्यक्ष जितेंद्र भाटी, सत्यवीर मुखिया, फिरे प्रधान, पी पी शर्मा, सुनील बंसल, महेश कमांडो, सचिव एडवोकेट विमलेश रावल, ज्योति सिंह, वीरपाल मावी, जयदीप सिंह, गीता सागर, यशपाल नागर और तेजकुमार भाटी उपस्थित रहे।
