गाँवों के किसानों ने एक बार फिर अपनी पुरानी माँग दोहराई है। किसानों का कहना है कि जिनकी ज़मीन विकास कार्यों के लिए ली गई थी, उन्हें भी 4% विकसित आबादी भूखंड दिया जाए, चाहे उन्होंने कोर्ट में केस किया हो या नहीं।
किसानों ने बताया कि उनकी पुश्तैनी ज़मीन 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत ली गई थी और ज़्यादातर किसानों ने 1997 करार नियमावली के तहत मुआवज़ा भी ले लिया था। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश (21 अक्टूबर 2011) के बाद सिर्फ़ कुछ किसानों को ही 4% भूखंड दिए गए, जबकि बाकी किसानों को यह लाभ नहीं मिला।
किसानों का कहना है कि जब 64.7% अतिरिक्त मुआवज़ा सभी को समान रूप से दिया गया था, तो 4% भूखंड भी सबको मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि उस समय के प्राधिकरण चेयरमैन रमा रमन ने वादा किया था कि अदालत न जाने वाले किसानों को भी वही लाभ मिलेंगे जो कोर्ट से आदेशित हुए हैं, लेकिन आज तक यह वादा पूरा नहीं हुआ।
किसानों ने प्राधिकरण पर भेदभाव और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि सभी प्रभावित किसानों को 4% आबादी भूखंड देने का आदेश दिया जाए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे धरना, शांतिपूर्ण आंदोलन और कानूनी कदम उठाने को मजबूर होंगे।
