जिला न्यायालय ने एक युवती के साथ दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में दिल्ली निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकुश गढ़ोत्रा को बरी कर दिया है। यह मामला 2017 का है, जब युवती के पिता ने सेक्टर 58 कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी।
युवती और अंकुश दोनों एक ही कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर थे। आरोप था कि अंकुश ने युवती से शादी का वादा कर दो साल तक शारीरिक संबंध बनाए, और जब वह गर्भवती हुई तो गर्भपात करवा दिया और शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद युवती पर मानसिक दबाव डालकर उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया गया।
9 जून 2017 को युवती ने नोएडा में अपने आवास पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसने सुसाइड नोट भी छोड़ा था, जिसमें उसने अंकुश और उसके परिवार को जिम्मेदार ठहराया।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि केवल सुसाइड नोट में आरोपी का नाम होना दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है। धारा 306 के तहत साबित करना जरूरी है कि आरोपी ने सीधे युवती को आत्महत्या के लिए उकसाया। वहीं, दुष्कर्म के आरोप भी साबित नहीं हो पाए। इसलिए अदालत ने सबूतों के अभाव में अंकुश गढ़ोत्रा को बरी कर दिया।
